1. 44

    सुरेशः शरणं शर्म विश्वरेताः प्रजाभवः । अहः संवत्सरो व्यालः प्रत्ययः सर्वदर्शनः ॥ १०॥

    86. Suresah: The Lord of all the other gods. 87. Saranam: One who is the Refuge. 88. Sarma: One who is Bliss. 89. Visvaretah: The seed for the Universe. 90. Prajabhavah: One from whom all beings have originated. 91. Ahah: Protector of Devotees. 92. Samvatsarah: He who lives for the upliftment of His devotees. 93. Vyalah: One who is beyond the grasp. 94. Pratyayah: One who can be relied upon. 95. Sarvadarsanah: One who shows his grace to all.

    86. सुरेशः: सभी अन्य देवताओं के स्वामी। 87. शरणं: जिनकी शरण है। 88. शर्म: आनंद। 89. विश्वरेतः: ब्रह्मांड का आदिकरण। 90. प्रजाभवः: जिनसे सभी प्राणी उत्पन्न हुए हैं। 91. अहः: भक्तों के प्रतिरक्षक। 92. संवत्सरः: वे जो अपने भक्तों के सुधारण के लिए जीते हैं। 93. व्यालः: जिन्होंने कब्जा किया है। 94. प्रत्ययः: जिन पर आश्रय लिया जा सकता है। 95. सर्वदर्शनः: वे जो सभी को अपने अनुग्रह का प्रदर्शन करते हैं।