1. 45

    अजः सर्वेश्वरः सिद्धः सिद्धिः सर्वादिरच्युतः । वृषाकपिरमेयात्मा सर्वयोगविनिःसृतः ॥ ११॥

    96. Ajah: Unborn and the Remover of all obstacles. 97. Sarvesvarah: One who is the isvara for all isvaras. 98. Siddhah: One who is reachable and knowledgeable. 99. Siddhih: The Goal. 100. Sarvadih: The Origin or Cause of all things. 101. Acyutah: One who undergoes no changes like birth, decay, etc. 102. Vrishakapih: One who lifted the Earth in the form of Varaaha. 103. Ameyatma: One whose nature cannot be comprehended. 104. Aarva yoga vinissritah: One who is beyond any attachment.

    96. अजः: अजन्मा और सभी अवरोधों को हटाने वाला। 97. सर्वेश्वरः: सभी ईश्वरों के लिए ईश्वर होने वाला। 98. सिद्धः: पहुँचने और ज्ञानी होने वाला। 99. सिद्धिः: उद्देश्य। 100. सर्वादिः: सब चीजों का कारण या उत्पत्ति स्थान। 101. अच्युतः: जिसे जन्म, विनाश आदि की कोई परिवर्तन नहीं होता है। 102. वृषकपिः: जिन्होंने वराह रूप में पृथ्वी को उठाया। 103. अमेयात्मा: जिनकी प्रकृति को समझा नहीं जा सकता। 104. आर्वयोग विनिःश्रितः: जो किसी भी आसक्ति से परे हैं।