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    प्रमाणं प्राणनिलयः प्राणभृत्प्राणजीवनः । तत्त्वं तत्त्वविदेकात्मा जन्ममृत्युजरातिगः ॥ १०३॥

    959. Pramaanam: He whose very form is the Vedas. 960. Praananilayah: He in whom all praanas stand established. 961. Praana-brit: He who rules over all Praanas 962. Praana-jeevanah: He who maintains the life-birth in all living creatures 963. Tattvam: He who isthe Reality that which is eternal 964. Tattvavit: One who has realized fully the reality. 965. Ekaatmaa: Supersoul in the universe. 966. Janma-mrityu-jaraa-atigah: One who has no change or modifications in Himself

    959. प्रमाणम्: जिनका स्वरूप ही वेद है। 960. प्राणनिलयः: वह जिसमें सभी प्राण नियमित हैं। 961. प्राणबृत्: वह जो सभी प्राणों पर शासन करते हैं। 962. प्राणजीवनः: वह जो सभी जीवों का जीवन बनाए रखते हैं। 963. तत्त्वम्: वह जो वास्तविकता है, जो शाश्वत है। 964. तत्त्ववित्: वह जो वास्तविकता को पूरी तरह से जान चुके हैं। 965. एकात्मा: ब्रह्मांड में सुपरसोल। 966. जन्ममृत्युजरातिगः: वह जिनमें कोई परिवर्तन या मॉडिफिकेशन नहीं होता।