1. 21

    अमृतांशूद्भवो बीजं शक्तिर्देवकिनन्दनः । त्रिसामा हृदयं तस्य शान्त्यर्थे विनियोज्यते ॥ २१॥

    The seed of the sun, born from the ocean of nectar, is the energy of the delighter of Devaki (Krishna). It is placed in the heart for the purpose of tranquility through the Tri-Sama (Rigveda chant).

    सूर्य के बीज, अमृत के समुद्र से उत्पन्न होने वाला, देवकी के आनंदकर्ता (कृष्ण) की ऊर्जा है। यह त्रि-साम (रिग्वेद की मंत्र गायन) के माध्यम से शांति के उद्देश्य से हृदय में रखा गया है।