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    महर्षिः कपिलाचार्यः कृतज्ञो मेदिनीपतिः । त्रिपदस्त्रिदशाध्यक्षो महाश‍ृङ्गः कृतान्तकृत् ॥ ५७॥

    534. Maharshih: The Great Seer. 535. Kapilacaryah: He Who is a teacher. 536. Krtajnah: He Who remembers the good deed done. 537. Medinipatih: The Lord or Protector of the Earth. 538. Tripadah: He Who is in the form of pranava mantra with three letters. 539. Tridasadhyakshah: The Savior of the thirty-three gods. 540. Maha-sringah: The Big-tusked Varaha. 541. Kritantakrit: He who kills death himself.

    534. महर्षिः: महान ऋषि। 535. कपिलाचार्यः: वह जो एक शिक्षक हैं। 536. कृतज्ञः: वह जो किए गए अच्छे कर्म को याद रखते हैं। 537. मेदिनीपतिः: पृथ्वी के संरक्षक या भगवान। 538. त्रिपदः: वह जो तीन अक्षरों के प्रणव मंत्र के रूप में हैं। 539. त्रिदशाध्यक्षः: तीनतीन देवताओं के उद्धारक। 540. महाशृङ्गः: बड़े दांतों वाले वराह। 541. कृतान्तकृत्: वह जो मौत को खुद मारते हैं।