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    तेजोवृषो द्युतिधरः सर्वशस्त्रभृतां वरः । प्रग्रहो निग्रहो व्यग्रो नैकश‍ृङ्गो गदाग्रजः ॥ ८१॥

    763. Tejo-vrshah: He Who showers His splendor on His devotees in the form of His protection. 764. Dyuti-dharah: He Who is like a majesty. 765. Sarva-Sastra-bhrtam-varah: The Best among those warriors who are armed with all weapons. 766. Pragrahah: The Controller. 767. Nigrahah: He Who has firm control over all creation. 768. Vyagrah: He Who has no end. 769. naika-sr’ngah: He Who has many rays of effulgence radiating from Him. 770. gadagrajah: The elder brother of gada.

    763. तेजोवृषः: वह जो अपने भक्तों पर अपने संरक्षण के रूप में अपने शौर्य की बूँदें बरसाते हैं। 764. द्युति-धरः: वह जो एक महान शक्ति की तरह है। 765. सर्व-शस्त्र-भृतां-वरः: वह योद्धाओं में से सब सशस्त्रों से युक्त सर्वश्रेष्ठ हैं। 766. प्रग्रहः: नियंत्रक। 767. निग्रहः: वह जो सम्पूर्ण सृजन के अधिपति हैं। 768. व्यग्रः: वह जिसका अंत नहीं है। 769. नैक-शृङ्गः: वह जिसके बहुत सारे प्रकाश की किरणें हैं। 770. गदा-ग्रजः: गदा के बड़े भाई।