1. 31

    निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ ३१ ॥

    He (Shankaracharya) always worshipped Lord Shankar and never for a moment pondered his mind on you. ॥ 31 ॥

    उन्होने नित्य ही शंकर भगवान का ध्यान किया, लेकिन आपका स्मरण कभी नहीं किया। ॥ ३१ ॥