1. 28

    ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई ॥ २८ ॥

    He who meditates upon your form with concentration goes beyond the cycle of births and deaths. ॥ 28 ॥

    जो प्राणी निष्ठापूर्वक आपका ध्यान करता है वह जन्म-मरण के बन्धन से निश्चित ही मुक्त हो जाता है। ॥ २८ ॥