1. 36

    आशा तृष्णा निपट सतावे । मोह मदादिक सब विनशावै ॥ ३६ ॥

    Hopes and wishes always bother me. All sort of passions and lust torment my heart ever. ॥ 36 ॥

    हे माता! आशा और तृष्णा मुझे निरन्तर सताती रहती हैं। मोह, अहंकार, काम, क्रोध, ईर्ष्या भी दुखी करते हैं। ॥ ३६ ॥