1. 20

    अयि मयि दीनदयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे अयि जगतो जननीति यथाऽसि मयाऽसि तथाऽनुमतासि रमे। यदुचितमत्र भवत्पुरगं कुरु शाम्भवि देवि दयां कुरु मे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥

    O Goddess Uma, deign to bestow on me also Your compassion, You who are always inclined to shower compassion on the weak, O Goddess Rama, may You be hailed as the Mother of the universe. You are my mother also. I too am Your son. You may reject my prayer if it is not proper. Deign to remove my sorrow. ॥ 20 ॥

    हे उमे! आप सदा दीन-दु:खियों पर दया का भाव रखती हैं, अतः आप मुझ पर कृपालु बनी रहें। हे महालक्ष्मी! जैसे आप सारे संसार की माता हैं, वैसे ही मैं आपको अपनी भी माता समझता हूँ। हे शिवे! यदि आपको उचित प्रतीत होता हो तो मुझे अपने लोक में जाने की योग्यता प्रदान करें। हे देवि! मुझ पर दया करो। हे भगवान शिव की प्रिय पत्नी महिषासुरमर्दिनीपार्वती ! आपकी जय हो, जय हो ॥ २० ॥