1. 10

    अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते । सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥

    You who are supremely lustrous and decorated by the flowers in the form of the charming minds of the good, who shine like the moon for the lotuses in a lotus-pond, the movement of whose charming eyes gives the impression of hovering bees, You who have charming locks of hair, O Daughter of the Mountain, hail unto You, hail unto You. ॥ 10 ॥

    प्रसन्नचित्त तथा सन्तुष्ट देवताओं द्वारा अर्पित किये गये पुष्पों से अत्यन्त मनोरम कान्ति धारण करनेवाली, निशाचरों को वर प्रदान करनेवाले शिव की भार्या रात्रिसूक्त से प्रसन्न होनेवाली, चन्द्रमा के समान मुखमण्डलवाली और सुन्दर नेत्रवाले कस्तूरी मृग में व्याकुलता उत्पन्न करनेवाले भौंरों से तथा भ्रान्ति को दूर करनेवाले ज्ञानियों से अनुसरण की जानेवाली हे भगवान शिव की प्रिय पत्नी महिषासुर मर्दिनी पार्वती! आपकी जय हो, जय हो ॥ १० ॥