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    रुद्राष्टकमिदम् प्रोक्तम् विप्रेण हरतोषये। ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषाम् शम्भुः प्रसीदति ॥ ९ ॥

    This Ashtak of Lord Rudra is for the praise of that Shankar ji. Sri Shankar is pleased with the people who read it in the form of love. ॥ 9 ॥

    भगवान रुद्र का यह अष्टक उन शंकर जी की स्तुति के लिये है। जो मनुष्य इसे प्रेमस्वरूप पढ़ते हैं, श्रीशंकर उन से प्रसन्न होते हैं। ॥ ९ ॥