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    अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे । दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥

    You whose hands gave protection and boons to the brave husbands of the women in the enemy’s camp who surrendered themselves to You, who wield in Your hand for the slaying of enemies the sanctified trident which removes the sorrows of all the three worlds, who make the quarters resound with the divine musical instrument known as ‘Dundubhi’, You who have charming locks of hair, O Daughter of the Mountain, hail unto You, hail unto You. ॥ 8 ॥

    शरणागत शत्रुओं की स्त्रियों के वीर पतियों को अभय प्रदान करनेवाले हाथ से शोभा पानेवाली, तीनों लोकों को पीड़ित करनेवाले दैत्य शत्रुओं के मस्तक पर प्रहार करने योग्य तेजोमय त्रिशूल हाथ में धारण करनेवाली तथा देवताओं की दुन्दुभि से ‘दुम्-दुम्’ इस प्रकारकी ध्वनि से समस्त दिशाओं को बार-बार गुंजित करनेवाली हे भगवान् शिव की प्रिय पत्नी महिषासुर मर्दिनी पार्वती! आपकी जय हो, जय हो ॥ ८ ॥