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    न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानम् तदपि च न जाने स्तुतिकथाः । न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥ १ ॥

    (O Mother) neither your mantra, nor yantra (do I know); and alas, not even I know your stutI (eulogy), I do not know how to invoke you through dhyana (meditation); (and alas), not even I know how to simply recite your glories (stuti-katha), I do not know your mudras (to contemplate on you); (and alas), not even I know how to simply cry for you, However, one thing I know (for certain); by following you (somehow through rememberance however imperfectly) will take away all my afflictions (from my mind).

    माँ! मैं न मन्त्र जानता हूँ, न यंत्र; अहो! मुझे स्तुति का भी ज्ञान नहीं है. न आवाहन का पता है, न ध्यान का. स्तोत्र और कथा की भी जानकारी नहीं है. न तो तुम्हारी मुद्राएँ जानता हूँ और न मुझे व्याकुल होकर विलाप करना हि आता है; परन्तु एक जानता हूँ, केवल तुम्हारा अनुसरण करना- तुम्हारे पीछे चलना, जो कि सब क्लेशों को समस्त दुःख विपत्तियों को हर लेने वाला है.