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    विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् । तदेतत् क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥२॥

    (O Mother) due to ignorance of the vidhis (injunctions of worship), and due to lack of wealth, as well as due to my indolent (lazy) nature, … it was not possible for me to serve your lotus feet; there have been failures on the performance of my duties (I admit that), (but) all these are pardonable (by you), O Mother; because you are the saviour of all, O Shivaa (auspicious mother), there can be Kuputra (fallen disobedient son turning away from mother), but there can never be Kumata (mother turning away from son permanently).

    सब का उद्धार करने वाली कल्यान्मायी माता! में पूजा की विधि नहीं जानता, मेरे ओआस धन का भी अभाव है, में स्वभा से भी आलसी हूँ तथा मुझसे ठीक-ठीक पूजा का सम्पादन भी नहीं हो सकता; इन सब कारणों से तुम्हारे चरणों की सेवा में जो त्रुटि हो गयी है, उसे क्षमा करना; क्योंकि कुपुत्र का होना संभव है, किन्तु कहीं भी कुमाता नहीं होती.