1. 5

    कृताम्नाय गानम् खगाधीशयानं विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानम् । स्वभक्तानुकूलम् जगदृक्षमूलम् निरस्तार्तशूलम् भजेऽहं भजेऽहं ।। ५ ।।

    I worship him, who is the singer of the Vedas and rides the on the king of birds. Lord Vishnu is the cause of salvation and also kills the enemies of Lord Shiva. He is very partial to his devotees and considered as the root of the tree of the world. Shri Hari is the examinator of all sorrows. ।। 5 ।।

    जो वेदों के गायक हैं, पक्षीराज गरुड़ की जो सवारी करते हैं, जो मुक्तिदाता हैं और शत्रुओं का जो मान हरते हैं। जो अपने भक्तों के प्रिय हैं, जो जगत रुपी वृक्ष की जड़ हैं, जो सभी दुखों को निरस्त (ख़त्म) कर देते हैं, उन भगवान् विष्णु को में बारम्बार भजता /ती हूँ । ।। ५ ।।