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    लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ । शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ ९ ॥

    He who recites this Lingashtakam near Sambashiva, the purifier, certainly resides in Shiva's abode (Kailash) and remains immensely pleased in the company of Shiva. ॥ 9 ॥

    जो साम्ब सदाशिव के समीप पुण्यकारी इस लिंगाष्टक का पाठ करता है, वह निश्चित ही शिवलोक ( कैलास ) में निवास करता है तथा शिव के साथ रहते हुए अत्यन्त प्रसन्न होता है ॥ ९ ॥