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    सुरगुरुसुरवरपूजित लिङ्गं सुरवनपुष्प सदार्चित लिङ्गम् । परात्परं परमात्मक लिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ ८ ॥

    The Linga who is worshipped by the guru of the gods and elite of the devas, the Linga who is worshipped with the divine flowers and the Linga who is higher than the highest, the supreme Self, to that Linga, (representing) Sadashiva, my prostrations. ॥ 8 ॥

    जो लिंग देवगुरु बृहस्पति एवं देवश्रेष्ठ इन्द्रादि के द्वारा पूजित, निरंतर नंदनवन के दिव्य पुष्पों द्वारा अर्चित, परात्पर एवं परमात्म स्वरुप है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ ॥ ८ ॥