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    सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् । सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ ३ ॥

    The Linga that is well annointed with all fragrance and that which is the cause of the growth of intellect, the Linga who is worshipped by the Siddhas, Devas, and Asuras, to that Linga, (representing) Sadashiva, my prostrations. ॥ 3 ॥

    जो लिंग सभी दिव्य सुगन्धि ( अगर, तगर, चन्दन आदि ) से सुलेपित, बुद्धि की वृद्धि करने वाला, समस्त सिद्ध, देवता एवं असुरगणों से वन्दित है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ ॥ ३ ॥