1. 12

    मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि । एवं ज्ञात्वा महादेवि यथायोग्यं तथा कुरु ॥१२॥

    (O Mother) there is no one as fallen like me, and there is no one as uplifting (by removing sins) like you, considering thus, O Mahadevi, please do whatever is proper (to save me).

    हे महादेवी ! मेरे सामान कोई पातकी नहीं और तुम्हारे सामान कोई पाप हरिणी नहीं ऐसा जानकार जो उचित परे वो करो I