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    जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि । धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाट पट्‍टपावके किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥ २ ॥

    I have a very deep interest in Lord Shiva, whose head is glorified by the rows of moving waves of the celestial river Ganga, agitating in the deep well of his hair-locks, and who has the brilliant fire flaming on the surface of his forehead, and who has the crescent moon as a jewel on his head. ॥ 2 ॥

    मेरी शिव में गहरी रुचि है, जिनका सिर अलौकिक गंगा नदी की बहती लहरों की धाराओं से सुशोभित है, जो उनकी बालों की उलझी जटाओं की गहराई में उमड़ रही हैं? जिनके मस्तक की सतह पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित है, और जो अपने सिर पर अर्ध-चंद्र का आभूषण पहने हैं। ॥ ੨ ॥