1. 11

    जयत्वदभ्र विभ्रम भ्रमद्भुजङ्गमश्वस द्विनिर्गमत् क्रमस्फुरत् कराल फालहव्यवाट् । धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन् मृदङ्ग तुङ्ग मङ्गल ध्वनिक्रम प्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥ ११ ॥

    Lord Shiva, whose dance of Tandava is in tune with the series of loud sounds of drum making Dhimid Dhimid sounds, who has the fire on the great forehead, the fire that is spreading out because of the breath of the snake wandering in whirling motion in the glorious sky. ॥ 11 ॥

    शिव, जिनका तांडव नृत्य नगाड़े की ढिमिड ढिमिड तेज आवाज श्रंखला के साथ लय में है, जिनके महान मस्तक पर अग्नि है, वो अग्नि फैल रही है नाग की सांस के कारण, गरिमामय आकाश में गोल-गोल घूमती हुई। ॥ ११ ॥