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    न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् । न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥ २ ॥

    There is no need to recite Kavacham , Argalam , Kilakam and the Rahasya thrayam, Nor is it necessary to recite Suktham , Dhyanam , Nyasam and also no need to worship. ॥ 2 ॥

    कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास यहाँ तक कि अर्चन भी आवश्यक नहीं है। ॥ २ ॥