1. 6

    धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके । कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥

    You whose clinking bangles shine by contact with your body in the festival of the battle with bows, whose enemies are killed by blows on the back of their necks with the weapon known as ‘Sringa’ which is resplendent like gold and yellow in colour, and adorns your hip, You who have charming locks of hair, O Daughter of the Mountain, hail unto You, hail unto You. ॥ 6 ॥

    युद्धभूमि में धनुष धारण कर अपने शरीर के स्पन्दनमात्र से शत्रुदल को कम्पित कर देनेवाली, स्वर्ण के पीले वर्ण के तीर और तरकश से युक्त भीषण योद्धाओं के सिर काटनेवाली और [हाथी-घोड़ा, रथ, पैदल] चारों प्रकार की सेनाओं का संहार करके रणभूमि में अनेक प्रकार की शब्दध्वनि करनेवाले बटुकों को उत्पन्न करनेवाली हे भगवान शिव की प्रिय पत्नी महिषासुर मर्दिनी पार्वती! आपकी जय हो, आपकी जय हो। ॥ ६ ॥