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    अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते । निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥

    You who cut down with the weapon known as ‘Satakhanda’ the heads and trunks of mighty elephants, whose mount is the powerful lion which killed the elephants of the enemy with severe blows on their necks, who killed the ferocious generals of the army of Bhandasura with blows by your hand, You who have charming locks of hair, O Daughter of the Mountain, hail unto You, hail unto You. ॥ 5 ॥

    गजाधिपति के बिना सूँड के धड़ को काट-काटकर सैकड़ों टुकड़े कर देनेवाली, सेनाधिपति चण्ड-मुण्ड नामक दैत्यों को अपने भुज दण्ड से मार-मारकर विदीर्ण कर देनेवाली, शत्रुओं के हाथियों के गण्डस्थल को भग्न करने में उत्कट पराक्रम से सम्पन्न कुशल सिंह पर आरूढ़ होनेवाली हे भगवान शिव की प्रिय पत्नी महिषासुर मर्दिनी पार्वती! आपकी जय हो, जय हो ॥ ५ ॥