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    अयि निजहुंकृतिमात्रनिराकृतधूम्रविलोचनधूम्रशते समरविशोषितरोषितशोणितबीजसमुद्भवबीजलते। शिवशिवशुम्भनिशुम्भमहाहवतर्पितभूतपिशाचरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥

    You who eliminated Dhoomralochana and hundreds of Dhoomras by a mere ‘humkaara’, who slew in battle numerous Raktabijas who rose up from the blood of Raktabija who was weakened in the fight, and, wonder of wonders, who slew in a mighty battle Sumbha, Nisumbha, and the arrogant leaders of the ghosts, who have charming locks of hair, O Daughter of the Mountain, hail unto You, hail unto You. ॥ 4 ॥

    अपने हुंकारमात्र से धूम्रलोचन तथा धूम्र आदि सैकड़ों असुरों को भस्म कर देनेवाली, युद्धभूमि में कुपित रक्तबीज के रक्त से उत्पन्न हुए अन्य रक्तबीज समूह का रक्त पी जानेवाली और शुम्भ निशुम्भ नामक दैत्यों के महायुद्ध से तृप्त किये गये मंगलकारी शिव के भूत पिशाचों के प्रति अनुराग रखनेवाली हे भगवान शिव की प्रिय पत्नी महिषासुर मर्दिनी पार्वती! आपकी जय हो, जय हो ॥ ४ ॥