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    सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥

    O Daughter of the Mountain, who delight Indra, who crushed the demon Durdhara, who subdued Durmukha, who are immersed in bliss, who nourish all the three worlds, who make Sankara happy, who remove all sins, who delight in celebration, who are angry with Asuras, who destroy evil pride, who destroyed the demon Durdama, who was born as the daughter of the ocean (as Lakshmi), who have charming locks of hair, O Daughter of the Mountain, hail unto You, hail unto You. ॥ 2 ॥

    देवराज इन्द्र को समृद्धशाली बनानेवाली, दुर्धर तथा दुर्मुख नामक दैत्यों का विनाश करनेवाली, सर्वदा हर्षित रहनेवाली, तीनों लोकों का पालन-पोषण करनेवाली, भगवान् शिव को सन्तुष्ट रखनेवाली, पाप को दूर करनेवाली, घोर गर्जन करनेवाली, दैत्यों पर भीषण कोप करनेवाली, अहंकारियों के मद का हरण करनेवाली, सदाचार से रहित मुनिजनों पर क्रोध करनेवाली और समुद्र की कन्या महालक्ष्मी के रूप में प्रतिष्ठित हे भगवान शिव की प्रिय पत्नी महिषासुर मर्दिनी पार्वती! आपकी जय हो, जय हो ॥ २ ॥