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    अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम् । अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकन्धरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ ७ ॥

    Salutations to Lord Kalabhairava, the supreme lord of Kashi, whose loud roar destroys the sheaths of creations (meaning the delusions of our mind) of the lotus-born Brahma; whose very glance is enough to destroy all our sins; who gives us the eight siddhis (accomplishments); and who wears a garland of skulls. ॥ 7 ॥

    जिनके अट्टहास से समुचित ब्रह्मांड विदीर्ण होता है, और जिनके दृष्टिपात से समुचित पापों का समूह नष्ट होता है, तथा जिनका शासन कठोर है, जिन्होंने कपालमाला धारण की है और जो आठ प्रकार की सिद्धियों के प्रदाता है, ऐसे काशीपुरी के स्वामी का मैं भजन (आराधना) करता हूँ. ॥ ७ ॥