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    नवीनमेघमण्डली निरुद्ध दुर्धर स्फुरत् कुहू निशीथिनी तमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः । निलिम्प निर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः कलानिधान बन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः ॥ ८ ॥

    May Lord Shiva give us prosperity, who bears the burden of this universe, who is lovely with the moon, who is red wearing the skin, who has the celestial river Ganga, whose neck is dark as midnight of new moon night covered by many layers of clouds. ॥ 8 ॥

    भगवान शिव हमें संपन्नता दें, वे ही पूरे संसार का भार उठाते हैं, जिनकी शोभा चंद्रमा है, जिनके पास अलौकिक गंगा नदी है, जिनकी गर्दन गला बादलों की पर्तों से ढंकी अमावस्या की अर्धरात्रि की तरह काली है। ॥ ८ ॥