1. 8

    रमावामभागम् तलानग्ननागम् कृताधीनयागम् गतारागरागम्। मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं गुणौगैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ।। ८ ।।

    I worship him, who keeps Lakshmi on his left side and can be approached by Yagas. Shri Krishna is not interested in anything and also carried the Govardhan Mountain. He is pure music to great sages and always served by Devas, who is above all beings. ।। 8 ।।

    जिनके वाम (बाएं) भाग में लक्ष्मी विराजित होती हैं, जो नग्न नाग पर विराजित हैं, जो यज्ञों से प्राप्त किये जा सकते हैं और जो राग-रंग से मुक्त हैं। ऋषि-मुनि जिनके गीत गाते हैं, देवता जिनकी सेवा करते हैं और जो गुणों से परे हैं, उन भगवान् विष्णु को मैं बारम्बार भजता/ ती हूँ। ।। ८ ।।