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    रमाकण्ठहारं श्रुतिवातसारं जलान्तर्विहारं धराभारहारम् । चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं धृतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ।। ३ ।।

    I worship him, who is the garland in the neck of Lakshmi and have the essence of Vedas. He lives inside the water and also lightens the weight of earth. Lord Vishnu has a form which is eternally pleasing and attracts the mind. It is assumed that he has several forms. ।। 3 ।।

    जिनके गले के हार में देवी लक्ष्मी का चिन्ह बना हुआ है, जो वेद वाणी के सार हैं, जो जल में विहार करते हैं और पृथ्वी के भार को धारण करते हैं। जिनका सदा आनंदमय रूप रहता है और मन को आकर्षित करता है, जिन्होंने अनेकों रूप धारण किये हैं, उन भगवान् विष्णु को मैं बारम्बार भजता/ती हूँ । ।। ३ ।।