1. 31

    श्रीशुक उवाच इति ब्रुवाणं नृपतिं जगत्पतिः सत्यव्रतं मत्स्यवपुर्युगक्षये । विहर्तुकामः प्रलयार्णवेऽब्रवीच्चिकीर्षुरेकान्तजनप्रियः प्रियम् ।। ८-२४-३१ ।।

    Śukadeva Gosvāmī said: When King Satyavrata spoke in this way, the Supreme Personality of Godhead, who at the end of the yuga had assumed the form of a fish to benefit His devotee and enjoy His pastimes in the water of inundation, responded as follows. ।। 8-24-31 ।।

    शुकदेव गोस्वामी ने कहा : जब राजा सत्यव्रत ने इस तरह कहा तो अपने भक्त को लाभ पहुँचाने तथा बाढ़ के जल में अपनी लीलाओं का आनन्द उठाने के लिए युग के अन्त में मछली का रूप धारण करने वाले भगवान् ने इस प्रकार उत्तर दिया। ।। ८-२४-३१ ।।

  2. 32

    श्रीभगवानुवाच सप्तमेऽद्यतनादूर्ध्वमहन्येतदरिन्दम । निमङ्क्ष्यत्यप्ययाम्भोधौ त्रैलोक्यं भूर्भुवादिकम् ।। ८-२४-३२ ।।

    The Supreme Personality of Godhead said: O King, who can subdue your enemies, on the seventh day from today the three worlds — Bhūḥ, Bhuvaḥ and Svaḥ — will all merge into the water of inundation. ।। 8-24-32 ।।

    भगवान् ने कहा : हे शत्रुओं को दमन कर सकने वाले राजा! आज से सातवें दिन भू:, भुव:, तथा स्व: ये तीनों लोक बाढ़ के जल में डूब जायेंगे। ।। ८-२४-३२ ।।

  3. 33

    त्रिलोक्यां लीयमानायां संवर्ताम्भसि वै तदा । उपस्थास्यति नौः काचिद्विशाला त्वां मयेरिता ।। ८-२४-३३ ।।

    When all the three worlds merge into the water, a large boat sent by Me will appear before you. ।। 8-24-33 ।।

    जब तीनों लोक जल में डूब जायेंगे तो मेरे द्वारा भेजी गई एक विशाल नाव तुम्हारे समक्ष प्रकट होगी। ।। ८-२४-३३ ।।

  4. 34

    त्वं तावदोषधीः सर्वा बीजान्युच्चावचानि च । सप्तर्षिभिः परिवृतः सर्वसत्त्वोपबृंहितः ।। ८-२४-३४ ।।

    Thereafter, O King, you shall collect all types of herbs and seeds and load them on that great boat. Then, accompanied by the seven ṛṣis and surrounded by all kinds of living entities, ।। 8-24-34 ।।

    हे राजा! तत्पश्चात् तुम सभी तरह की औषधियाँ एवं बीज एकत्र करोगे और उन्हें उस विशाल नाव में लाद लोगे। तब सप्तर्षियों समेत एवं सभी प्रकार के जीवों से घिरकर ।। ८-२४-३४ ।।

  5. 35

    आरुह्य बृहतीं नावं विचरिष्यस्यविक्लवः । एकार्णवे निरालोके ऋषीणामेव वर्चसा ।। ८-२४-३५ ।।

    You shall get aboard that boat, and without moroseness you shall easily travel with your companions on the ocean of inundation, the only illumination being the effulgence of the great ṛṣis. ।। 8-24-35 ।।

    तुम उस नाव में चढ़ोगे और बिना किसी खिन्नता के तुम अपने संगियों सहित बाढ़ के समुद्र में सुगमता से विचरण करोगे। उस समय ऋषियों का तेज ही एकमात्र प्रकाश होगा। ।। ८-२४-३५ ।।