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    हरं सर्पहारं चिता भूविहारं भवं वेदसारं सदा निर्विकारम् । श्मशाने वसन्तं मनोजं दहन्तं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ ८ ॥

    I pray You, Siva, Sankara, Sambhu, Who is known as Hara, Who has a garland of snakes, Who roams around the cremation grounds, Who is the universe, Who is the summary of the Veda (or the One discussed by Veda), Who is always dispassionate, Who is living in the cremation grounds, Who is burning desires born in the mind, and Who is the Lord of everyone. ॥ 8 ॥

    मैं आपसे प्रार्थना करता हूं, शिव, शंकर, शंभु, जिन्हें हारा के नाम से जाना जाता है, जिनके पास सांपों की एक माला है, जो श्मशान के चारों ओर घूमते हैं, जो ब्रह्मांड है, जो वेद का सारांश है , जो सदैव तिरस्कृत रहते है, जो श्मशान में रह रहे है, जो मन में पैदा हुई इच्छाओं को जला रहइ है, और जो सभी के भगवान है। ॥ ८ ॥